पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- गृह मंत्रालय (MHA) ने भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-निरोधक नीति और रणनीति ‘प्रहार’ का अनावरण किया।
परिचय
- यह वही सैद्धांतिक दृष्टिकोण है जो भारत की ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता’ नीति को दिशा देता है।
- भारत की आतंकवाद-निरोधक रणनीति ‘प्रहार’ इन आदर्शों से प्रवाहित होती है:
- भारतीय नागरिकों और हितों की रक्षा हेतु आतंकवादी हमलों की रोकथाम।
- खतरों के अनुरूप त्वरित और संतुलित प्रतिक्रिया।
- संपूर्ण शासन दृष्टिकोण में तालमेल हेतु आंतरिक क्षमताओं का समेकन।
- मानवाधिकार और ‘कानून के शासन’ आधारित प्रक्रियाओं द्वारा खतरों का शमन।
- आतंकवाद को सक्षम बनाने वाली परिस्थितियों, जिसमें उग्रवाद भी शामिल है, का शमन।
- आतंकवाद-निरोधक अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का संरेखण और आकार देना।
- संपूर्ण समाज दृष्टिकोण द्वारा पुनर्प्राप्ति और लचीलापन।
ऐसी नीति की आवश्यकता
- आतंकी समूहों का लक्ष्य: भारत, अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों का लक्ष्य रहा है।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: सीमा पार से संचालक नवीनतम तकनीकों, जैसे ड्रोन, का प्रयोग पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों एवं हमलों को सुगम बनाने हेतु करते हैं।
- सोशल मीडिया का उपयोग: प्रचार, संचार, वित्तपोषण और हमलों के मार्गदर्शन हेतु ये समूह सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और ‘इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन’ का प्रयोग करते हैं।
- तकनीकी प्रगति: एन्क्रिप्शन, डार्क वेब, क्रिप्टो वॉलेट जैसी तकनीकों ने इन्हें गुमनाम रूप से संचालित होने की सुविधा दी है।
- CBRNED तक पहुँच का खतरा: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल सामग्री तक आतंकियों की पहुँच रोकना आतंकवाद-निरोधक एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
नीति की प्रमुख विशेषताएँ
- रोकथाम: भारत सक्रिय ‘खुफिया-निर्देशित’ दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें खुफिया जानकारी एकत्र करना और उसे कार्यकारी एजेंसियों तक पहुँचाना प्राथमिकता है।
- मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में संयुक्त खुफिया कार्यबल (JTFI) वास्तविक समय में कुशल साझाकरण हेतु प्रमुख मंच हैं।
- प्रतिक्रिया: किसी भी हमले पर स्थानीय पुलिस प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता होती है, जिसे राज्य और केंद्रीय विशेष आतंकवाद-निरोधक बलों का सहयोग मिलता है।
- संवेदनशील राज्यों ने विशेष CT बल गठित किए हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आतंकवाद-निरोधक बल है, जो बड़े हमलों में राज्य बलों की सहायता करता है।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और राज्य पुलिस एजेंसियाँ आतंकवाद-निरोधक जांच करती हैं, जिनकी उच्च अभियोजन दर भविष्य के हमलों को रोकने में सहायक है।
- क्षमताओं का समेकन: CT एजेंसियों के लिए नवीनतम उपकरण, तकनीक और हथियारों का अधिग्रहण, साथ ही नए कौशल एवं रणनीतियों का प्रशिक्षण नियमित रूप से किया जाता है।
- मानवाधिकार और कानून आधारित प्रक्रियाएँ: भारत ‘कानून के शासन’ का पालन करता है, जहाँ कानून न्यायसंगत, समान रूप से लागू और मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।
- भारत 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का हस्ताक्षरकर्ता है और अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार संधि का अनुमोदन कर चुका है।
- आतंकवाद हेतु अनुकूल परिस्थितियों का शमन: आतंकी समूह भारतीय युवाओं को भर्ती करने का प्रयास करते रहते हैं।
- पहचाने जाने पर इन युवाओं पर क्रमबद्ध पुलिस प्रतिक्रिया होती है, जिसका उद्देश्य उग्रवाद और हिंसक अतिवाद की समस्या का व्यापक समाधान है।
- उग्रवाद के स्तर के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का संरेखण: भारत ने विभिन्न समझौतों जैसे पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT), प्रत्यर्पण संधि/व्यवस्था (ET/EA), संयुक्त कार्य समूह (JWG) और समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
- पुनर्प्राप्ति और लचीलापन: सार्वजनिक-निजी भागीदारी ने आतंकवादी हमलों के बाद तीव्र पुनर्प्राप्ति और लचीलेपन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- सरकार डॉक्टरों, मनोवैज्ञानिकों, वकीलों और अन्य नागरिक समाज के सदस्यों, जिनमें NGO, धार्मिक एवं सामुदायिक नेता शामिल हैं, को प्रभावित समुदाय को संवेदनशील बनाने तथा पुनः एकीकृत करने हेतु संलग्न करती है।
आगे की राह
- समन्वित बहु-एजेंसी कार्रवाइयों ने भारत की आतंकवाद-निरोधक प्रयासों में बड़ी सफलता दिलाई है।
- फिर भी, विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया संग्रह और जांच में एवं सहयोग की संभावना बनी हुई है।
- राष्ट्रीय कार्रवाइयाँ, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग के साथ मिलकर, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की चुनौतियों का समाधान करने के प्रमुख तत्व हैं।
- ‘प्रहार’ का उद्देश्य सभी आतंकी कृत्यों को अपराध घोषित करना और आतंकियों, उनके वित्तपोषकों एवं समर्थकों को धन, हथियार एवं सुरक्षित ठिकानों तक पहुँच से वंचित करना है।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 23-02-2026